बुध ग्रह - बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक

संक्षेप में
बुध बुद्धि, तर्क, वाणी, गणना, लेखन और व्यापार का कारक ग्रह है। यह कन्या राशि में उच्च और मीन राशि में नीच होता है। मिथुन और कन्या इसकी स्वराशियां हैं। बुध सूर्य के निकट रहने के कारण प्रायः अस्त हो जाता है।
बुध नवग्रहों में सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह है। यह सूर्य के सबसे निकट है, इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से भी वह सदैव सूर्य के आसपास ही रहता है। कुंडली में बुध सूर्य से कभी अट्ठाईस अंश से अधिक दूर नहीं होता।
बुध किसका कारक है
बुध बुद्धि, तर्क, विश्लेषण, वाणी, संवाद, लेखन, गणित, गणना, व्यापार, मध्यस्थता, हास्य और युवा अवस्था का कारक है।
शरीर में यह त्वचा, स्नायु तंत्र, फेफड़े और वाणी तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
बुध को कुमार यानी बालक ग्रह कहा गया है। इसीलिए बुध से प्रभावित लोगों में जीवन भर एक प्रकार की जिज्ञासा और चंचलता बनी रहती है।
बुध की स्थितियां
बुध कन्या राशि के पंद्रह अंश पर परम उच्च का होता है। यह एकमात्र ग्रह है जो अपनी ही स्वराशि में उच्च होता है। मीन राशि में यह नीच का होता है।
मिथुन और कन्या इसकी स्वराशियां हैं। सूर्य और शुक्र इसके मित्र हैं, चंद्रमा शत्रु है और शेष सम हैं।
बुध की उभयलिंगी प्रकृति
बुध की एक विशेषता यह है कि वह जिस ग्रह के साथ बैठता है, उसी का स्वभाव ग्रहण कर लेता है। इसे नपुंसक या उभयलिंगी प्रकृति कहा जाता है।
यदि बुध शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ फल देता है और पाप ग्रह के साथ हो तो अशुभ प्रवृत्ति ग्रहण कर लेता है। इसीलिए बुध का फल कहने से पहले उसकी संगति देखना अनिवार्य है।
बलवान बुध के लक्षण
बलवान बुध वाले व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली और स्पष्ट होती है। वे अपनी बात तर्क सहित रख पाते हैं।
उनकी गणना क्षमता और विश्लेषण शक्ति अच्छी होती है। व्यापार, लेखा, लेखन, शिक्षण और संचार से जुड़े क्षेत्रों में वे सहज सफल होते हैं।
ऐसे लोग शीघ्र सीखते हैं और नई परिस्थिति में जल्दी ढल जाते हैं।
कमजोर बुध के लक्षण
यदि बुध नीच राशि में हो, पूर्णतः अस्त हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो कुछ लक्षण देखे जाते हैं।
वाणी में अस्पष्टता या आत्मविश्वास की कमी रहती है। गणना और निर्णय में भ्रम होता है। व्यापार में हानि या साझेदारी में गलतफहमी संभव है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से त्वचा संबंधी समस्याएं और स्नायु तंत्र की दुर्बलता देखी जा सकती है।
बुधादित्य योग
जब सूर्य और बुध एक ही भाव में स्थित हों, तो बुधादित्य योग बनता है। यह अत्यंत प्रचलित योग है क्योंकि बुध सदैव सूर्य के निकट रहता है।
यह योग तीव्र बुद्धि, प्रभावी वाणी और प्रशासनिक क्षमता देता है। परंतु एक सूक्ष्म बात यह है कि यदि बुध सूर्य के अत्यधिक निकट हो और पूर्णतः अस्त हो जाए, तो योग का फल घट जाता है।
इसीलिए केवल युति देखकर उत्साहित होना पर्याप्त नहीं, अंशात्मक दूरी देखना आवश्यक है।
बुध के उपाय
बुधवार को हरी वस्तुओं का दान करना, विशेषकर हरी मूंग, शुभ माना जाता है।
भगवान गणेश की उपासना बुध के लिए सर्वोत्तम उपाय है। ॐ बुं बुधाय नमः मंत्र का जप किया जा सकता है।
पन्ना बुध का रत्न है, पर इसे भी कुंडली विश्लेषण के बाद ही धारण करना चाहिए।
एक व्यावहारिक उपाय जो शास्त्रों में भी बताया गया है, वह है वाणी का संयम। असत्य भाषण, कटु वचन और अनावश्यक वाद विवाद से बचना बुध को स्वाभाविक रूप से बलवान करता है। बहनों और मौसी का सम्मान भी बुध के लिए शुभ माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुध अस्त होने का क्या अर्थ है?+
जब बुध सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है तो वह अस्त कहलाता है और उसका बल घट जाता है। चूंकि बुध सदैव सूर्य के निकट रहता है, यह स्थिति सामान्य है। बुधादित्य योग बनने पर यह शुभ फल भी देती है।
बुधादित्य योग क्या है?+
सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनता है। यह तीव्र बुद्धि, अच्छी वाणी और प्रशासनिक क्षमता देता है। परंतु यदि बुध अत्यंत निकट होकर पूर्णतः अस्त हो जाए, तो फल घट जाता है।
कमजोर बुध के लक्षण क्या हैं?+
वाणी में हकलाहट या अस्पष्टता, गणना में कठिनाई, निर्णय में भ्रम, त्वचा संबंधी समस्याएं, स्नायु तंत्र की दुर्बलता और व्यापार में हानि सामान्य लक्षण हैं।
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