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ग्रह विश्लेषण

चंद्रमा - मन, माता और भावनाओं का कारक ग्रह

पंडित उदय शंकर तिवारी
5 मिनट
चंद्रमा - मन, माता और भावनाओं का कारक ग्रह

संक्षेप में

चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, स्मरण शक्ति और मानसिक संतुलन का कारक है। यह वृषभ राशि में उच्च और वृश्चिक में नीच होता है। कर्क इसकी स्वराशि है। शुक्ल पक्ष का चंद्रमा बली और कृष्ण पक्ष का क्षीण माना जाता है।

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को असाधारण महत्व दिया गया है। यह वह ग्रह है जिससे जन्म राशि तय होती है, जिससे विंशोत्तरी दशा की गणना होती है और जिससे गोचर फल देखा जाता है।

पाश्चात्य ज्योतिष सूर्य केंद्रित है, वैदिक ज्योतिष चंद्र केंद्रित है। इसका कारण गहरा है। वैदिक दृष्टि मानती है कि जीवन का अनुभव मन से होता है, और मन का स्वामी चंद्रमा है।

चंद्रमा किसका कारक है

चंद्रमा मन, भावनाएं, मानसिक संतुलन, स्मरण शक्ति, माता, जनसामान्य, तरल पदार्थ, जल, दूध, यात्रा और लोकप्रियता का कारक है।

शरीर में यह रक्त, फेफड़े, बाईं आंख और शरीर के तरल तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है।

चंद्रमा की विशेष स्थिति

चंद्रमा वृषभ राशि के तीन अंश पर परम उच्च का होता है और वृश्चिक राशि के तीन अंश पर परम नीच का। कर्क इसकी स्वराशि है।

सूर्य और बुध चंद्रमा के मित्र हैं। शेष ग्रह सम माने जाते हैं। चंद्रमा का कोई शत्रु नहीं माना जाता, जो अपने आप में एक सुंदर संकेत है।

चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है और पूरा चक्र सत्ताईस दिन में पूरा करता है।

बल का विशेष नियम

चंद्रमा का बल अन्य ग्रहों से भिन्न प्रकार से आंका जाता है। यहां पक्ष का महत्व सर्वोपरि है।

शुक्ल पक्ष में जैसे जैसे चंद्रमा पूर्णिमा की ओर बढ़ता है, उसका बल बढ़ता जाता है। कृष्ण पक्ष में अमावस्या की ओर बढ़ते हुए बल घटता जाता है।

अमावस्या के आसपास जन्मे व्यक्ति का चंद्रमा क्षीण कहलाता है। यह कोई अभिशाप नहीं है, पर ऐसे व्यक्ति में भावनात्मक संवेदनशीलता अधिक होती है और मानसिक स्थिरता के लिए सचेत प्रयास आवश्यक होते हैं।

बली चंद्रमा के लक्षण

बली चंद्रमा वाले व्यक्ति भावनात्मक रूप से संतुलित और सहज होते हैं। उनकी स्मरण शक्ति अच्छी रहती है।

उनमें लोगों से सहज जुड़ने की क्षमता होती है, इसलिए वे प्रायः लोकप्रिय होते हैं। माता से उनका संबंध मधुर रहता है और माता से सहयोग मिलता है।

ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं को समझने में कुशल होते हैं, जो नेतृत्व और परामर्श दोनों में उपयोगी गुण है।

पीड़ित चंद्रमा के लक्षण

यदि चंद्रमा क्षीण हो, नीच राशि में हो, या शनि, राहु और केतु से पीड़ित हो, तो कुछ प्रवृत्तियां देखी जाती हैं।

मन में अस्थिरता और बार बार बदलते विचार रहते हैं। छोटी बातों पर अधिक प्रभावित होने की प्रवृत्ति होती है। नींद संबंधी समस्याएं आ सकती हैं।

माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता या उनसे भावनात्मक दूरी संभव है। निर्णय लेने में कठिनाई होती है क्योंकि मन एक बिंदु पर स्थिर नहीं रहता।

केमद्रुम योग

यह चंद्रमा से जुड़ी एक विशेष स्थिति है। जब चंद्रमा से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में कोई ग्रह न हो, तो केमद्रुम योग बनता है।

इसे मानसिक एकाकीपन का योग कहा जाता है। पर यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यदि कुंडली के केंद्र भावों में कोई शुभ ग्रह स्थित हो, या चंद्रमा स्वयं केंद्र में हो, तो यह योग भंग हो जाता है।

व्यवहार में शुद्ध केमद्रुम योग बहुत कम मिलता है। घबराने की आवश्यकता नहीं होती।

चंद्रमा के उपाय

सोमवार को भगवान शिव को जल और दूध अर्पित करना चंद्रमा के लिए सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।

माता की सेवा और उनका सम्मान चंद्रमा को बलवान करने का सबसे प्रत्यक्ष मार्ग है।

चांदी धारण करना, सफेद वस्त्र, चावल, दूध और सफेद वस्तुओं का दान करना लाभकारी है।

ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का जप और नियमित ध्यान मानसिक स्थिरता लाने में सहायक होते हैं।

एक व्यावहारिक सुझाव यह भी है कि चंद्रमा से पीड़ित व्यक्ति को नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मन की स्थिरता में जीवनशैली की भूमिका ग्रह से कम नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केमद्रुम योग क्या है?+

जब चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव दोनों में कोई ग्रह न हो, तो केमद्रुम योग बनता है। यह मानसिक एकाकीपन और भावनात्मक अस्थिरता का संकेत देता है, पर केंद्र में शुभ ग्रह होने पर यह भंग हो जाता है।

क्षीण चंद्रमा का क्या अर्थ है?+

अमावस्या के आसपास जन्मे व्यक्ति का चंद्रमा क्षीण यानी बलहीन होता है। इससे मन में अस्थिरता, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक संवेदनशीलता अधिक रहती है। यह दोष नहीं, एक स्थिति है जिसे उपायों से संतुलित किया जाता है।

चंद्रमा को बलवान करने का सरल उपाय क्या है?+

सोमवार को शिव जी को जल और दूध अर्पित करना, माता की सेवा, चांदी धारण करना, सफेद वस्तुओं का दान और नियमित ध्यान चंद्रमा को संतुलित करने में सहायक हैं।

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