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कुंडली विश्लेषण

कुंडली में संतान योग - संतान प्राप्ति के ज्योतिषीय संकेत

पंडित उदय शंकर तिवारी
4 मिनट
कुंडली में संतान योग - संतान प्राप्ति के ज्योतिषीय संकेत

संक्षेप में

संतान सुख देखने के लिए पंचम भाव, पंचमेश और बृहस्पति की स्थिति देखी जाती है, तथा गहन विश्लेषण के लिए सप्तमांश यानी D7 कुंडली का प्रयोग होता है। निष्कर्ष दोनों जीवनसाथियों की कुंडली मिलाकर ही निकाला जाता है।

वैदिक ज्योतिष में पंचम भाव (पांचवां घर) संतान का प्रमुख भाव है। इसके अलावा बृहस्पति संतान का नैसर्गिक कारक ग्रह है। इन दोनों का अध्ययन संतान सुख के बारे में मूलभूत जानकारी देता है।

शुभ संतान योग: - पंचम भाव में बृहस्पति, चंद्रमा या शुक्र का होना - पंचमेश (पंचम भाव का स्वामी) केंद्र या त्रिकोण में शुभ स्थिति में - बृहस्पति की पंचम भाव या पंचमेश पर शुभ दृष्टि - नवांश कुंडली में भी पंचम भाव की शुभ स्थिति

संतान बाधा के ज्योतिषीय कारण: - पंचम भाव में राहु, शनि या मंगल की अशुभ स्थिति - पंचमेश नीच, अस्त या शत्रु राशि में - पंचम भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि - पितृ दोष की उपस्थिति

उपाय: - संतान गोपाल मंत्र का जाप - "ॐ देवकीसुत गोविंदाय वासुदेवाय नमः" - पुत्रदा एकादशी व्रत रखना - बृहस्पति ग्रह की शांति पूजा - संतान प्राप्ति हवन - बांकेबिहारी जी या बालगोपाल की पूजा

ध्यान रहे कि ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ चिकित्सकीय परामर्श भी आवश्यक है। ज्योतिष और चिकित्सा दोनों मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सप्तमांश कुंडली क्या है?+

प्रत्येक राशि को सात भागों में बांटकर बनाई गई विभाजनात्मक कुंडली, जो विशेष रूप से संतान से संबंधित विषयों के लिए देखी जाती है।

क्या ज्योतिष चिकित्सा का विकल्प है?+

बिल्कुल नहीं। संतान संबंधी विषयों में चिकित्सकीय परामर्श प्राथमिक है। ज्योतिष केवल अनुकूल काल और मानसिक संबल के लिए सहायक भूमिका निभा सकता है।

कौन से उपाय बताए जाते हैं?+

संतान गोपाल मंत्र का जप, गुरुवार को बृहस्पति के निमित्त दान और हरिवंश पुराण का श्रवण परंपरा में प्रचलित हैं।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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