सूर्य ग्रह - आत्मा, पिता और प्रतिष्ठा का कारक

संक्षेप में
सूर्य आत्मा, पिता, प्रतिष्ठा, नेतृत्व और सरकारी क्षेत्र का कारक ग्रह है। यह मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच होता है। सिंह इसकी स्वराशि है। बलवान सूर्य आत्मविश्वास और सम्मान देता है, जबकि पीड़ित सूर्य आत्मविश्वास की कमी और पिता से मतभेद दर्शाता है।
नवग्रहों में सूर्य को राजा का स्थान प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रह कहा जाता है, यद्यपि खगोल विज्ञान में वह तारा है। ज्योतिष में ग्रह का अर्थ है वह पिंड जो ग्रहण करता है और प्रभाव डालता है।
सूर्य किसका कारक है
सूर्य आत्मा का कारक है। वह आपके अस्तित्व का केंद्र, आपकी जीवन शक्ति और आपका मूल स्वभाव दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त सूर्य पिता, अधिकार, प्रतिष्ठा, नेतृत्व, सरकारी सेवा, राजनीति, आत्मविश्वास, हड्डियां, हृदय और दाहिनी आंख का प्रतिनिधित्व करता है।
सूर्य की स्थितियां
सूर्य मेष राशि के दस अंश पर परम उच्च का होता है और तुला राशि के दस अंश पर परम नीच का। सिंह इसकी स्वराशि है।
चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति सूर्य के मित्र हैं। शुक्र और शनि शत्रु हैं। बुध सम है।
सूर्य एक राशि में लगभग तीस दिन रहता है और पूरे चक्र में एक वर्ष लेता है।
बलवान सूर्य के लक्षण
जिनका सूर्य बलवान होता है, उनमें स्पष्ट आत्मविश्वास दिखाई देता है। ऐसे लोग स्वाभाविक रूप से नेतृत्व की भूमिका में आ जाते हैं।
उनका पिता से संबंध प्रायः अच्छा रहता है और पिता से सहयोग मिलता है। सरकारी कार्यों में उन्हें अपेक्षाकृत कम बाधा आती है। समाज में उन्हें सम्मान और पहचान मिलती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उनकी प्राणशक्ति अच्छी रहती है।
पीड़ित सूर्य के लक्षण
यदि सूर्य नीच राशि में हो, शत्रु राशि में हो, शनि, राहु या केतु से पीड़ित हो, या षष्ठ, अष्टम, द्वादश भाव में निर्बल स्थिति में हो, तो कुछ लक्षण देखे जाते हैं।
आत्मविश्वास में कमी और निर्णय लेने में झिझक रहती है। पिता से मतभेद या दूरी हो सकती है। अधिकारियों से टकराव और सरकारी कार्यों में विलंब होता है।
व्यक्ति योग्य होते हुए भी उचित श्रेय और पहचान नहीं पा पाता। यह इस स्थिति का सबसे सामान्य और सबसे निराशाजनक लक्षण है।
स्वास्थ्य में हड्डी, नेत्र और हृदय संबंधी विषयों पर ध्यान देना उचित रहता है।
सूर्य ग्रहण दोष और अस्त सूर्य
जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है, तो वह अस्त हो जाता है और उसका बल घट जाता है। यह सूर्य की तीव्रता का प्रभाव है।
यदि सूर्य के साथ राहु या केतु की युति हो, तो इसे ग्रहण योग कहा जाता है। इसमें आत्मविश्वास और पहचान के विषय अधिक जटिल हो जाते हैं।
सूर्य के लिए उपाय
सबसे सरल और प्रभावी उपाय सूर्य को जल अर्पित करना है। सूर्योदय के बाद एक घंटे के भीतर तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और अक्षत डालकर पूर्व की ओर मुख करके अर्घ्य दें।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है। यह वही स्तोत्र है जो अगस्त्य मुनि ने भगवान राम को युद्ध से पूर्व सुनाया था।
रविवार को गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करना शुभ है। सूर्य मंत्र ॐ घृणिः सूर्याय नमः का जप किया जा सकता है।
पिता का सम्मान करना और उनकी सेवा करना सूर्य को बलवान करने का सबसे प्रत्यक्ष उपाय माना जाता है।
रत्न के विषय में सावधानी
माणिक्य सूर्य का रत्न है, पर इसे कभी भी सामान्य सलाह पर नहीं पहनना चाहिए।
यदि आपकी कुंडली में सूर्य मारकेश या किसी अशुभ भाव का स्वामी है, तो माणिक्य धारण करने से लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है। रत्न सदैव पूर्ण कुंडली विश्लेषण के बाद ही धारण करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?+
आत्मविश्वास की कमी, नेतृत्व में झिझक, पिता से दूरी या मतभेद, सरकारी कार्यों में बाधा, हड्डी और नेत्र संबंधी समस्याएं तथा समाज में उचित पहचान न मिलना सामान्य लक्षण हैं।
सूर्य के लिए कौन सा रत्न पहना जाता है?+
माणिक्य सूर्य का रत्न है। परंतु रत्न कभी भी बिना पूर्ण कुंडली विश्लेषण के नहीं पहनना चाहिए। यदि सूर्य कुंडली में मारक या अशुभ भाव का स्वामी हो, तो माणिक्य हानि भी कर सकता है।
सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है?+
सूर्योदय के बाद एक घंटे के भीतर तांबे के लोटे में जल, थोड़ा लाल पुष्प और अक्षत डालकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके धीरे धीरे अर्पित करें। जल की धार से सूर्य को देखते हुए ॐ सूर्याय नमः का जप करें।
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