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योग एवं दोष

मांगलिक दोष क्या है और क्या आपको चिंता करनी चाहिए?

पंडित उदय शंकर तिवारी
4 मिनट
मांगलिक दोष क्या है और क्या आपको चिंता करनी चाहिए?

संक्षेप में

मांगलिक दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो। लगभग आधी कुंडलियों में यह किसी न किसी रूप में मिलता है और अनेक स्थितियों में यह स्वतः भंग हो जाता है, इसलिए इसे अभिशाप मानना उचित नहीं।

मांगलिक दोष, जिसे कुजा दोष भी कहा जाता है, वैदिक ज्योतिष में सबसे अधिक गलत समझी जाने वाली अवधारणाओं में से एक है। यह दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है।

बहुत से लोग इस स्थिति से डरते हैं और मानते हैं कि इससे विवाह में अशांति या जीवनसाथी को हानि होती है। लेकिन प्राचीन वैदिक शास्त्र इसके बारे में बहुत संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस और जोश का प्रतीक है। जब यह वैवाहिक जीवन से संबंधित भावों में स्थित होता है, तो यह तीव्र ऊर्जा कभी-कभी तनाव पैदा कर सकती है।

सत्य यह है कि लगभग 50 प्रतिशत लोगों की कुंडली में किसी न किसी रूप में मांगलिक दोष होता है। यह कोई अभिशाप नहीं है। इसके अलावा, ज्योतिष में कई अपवाद (दोष भंग) हैं जो इस दोष को पूरी तरह निष्प्रभावी कर देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मंगल अपनी ही राशि (मेष या वृश्चिक) में या उच्च राशि (मकर) में हो, तो नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो जाते हैं।

जब दो मांगलिक व्यक्ति विवाह करते हैं, तो दोष एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। यदि मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह हो, तो कुम्भ विवाह, हनुमान चालीसा का पाठ और विशेष रत्न धारण जैसे वैदिक उपाय किए जा सकते हैं।

भय के आधार पर निर्णय लेने से पहले, हमेशा एक अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें जो सही आकलन कर सके कि दोष वास्तव में आपकी कुंडली में है या पहले से निष्प्रभावी हो चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मांगलिक व्यक्ति का विवाह गैर-मांगलिक से हो सकता है?+

हां। ऐसी स्थिति में कुम्भ विवाह, हनुमान उपासना और उपयुक्त रत्न जैसे उपाय किए जाते हैं। इससे पहले यह जांचना आवश्यक है कि दोष वास्तव में सक्रिय है या पहले से भंग हो चुका है।

मांगलिक दोष कब भंग हो जाता है?+

यदि मंगल अपनी राशि मेष या वृश्चिक में हो, उच्च राशि मकर में हो, या बृहस्पति की दृष्टि उस पर हो, तो दोष का प्रभाव काफी घट जाता है। दोनों के मांगलिक होने पर भी दोष परस्पर निष्प्रभावी हो जाता है।

क्या मांगलिक दोष से जीवनसाथी को हानि होती है?+

यह सबसे बड़ी भ्रांति है। शास्त्र इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण रखते हैं। मंगल ऊर्जा और साहस का कारक है, और वैवाहिक भावों में उसकी तीव्रता कभी-कभी तनाव दे सकती है, हानि नहीं।

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