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कुंडली विश्लेषण

नवांश कुंडली (D9) क्या है और विवाह विश्लेषण में यह क्यों अनिवार्य है

पंडित उदय शंकर तिवारी
6 मिनट
नवांश कुंडली (D9) क्या है और विवाह विश्लेषण में यह क्यों अनिवार्य है

संक्षेप में

नवांश कुंडली प्रत्येक राशि को नौ बराबर भागों में बांटकर बनाई गई विभाजनात्मक कुंडली है। इसे D9 चार्ट कहते हैं। यह विवाह, जीवनसाथी और ग्रहों की वास्तविक शक्ति दर्शाती है। लग्न कुंडली में बलवान दिखने वाला ग्रह यदि नवांश में निर्बल हो, तो उसका शुभ फल सीमित रहता है।

वैदिक ज्योतिष में केवल एक कुंडली नहीं होती। षोडश वर्ग यानी सोलह विभाजनात्मक कुंडलियों की परंपरा है, और इनमें लग्न कुंडली के बाद सबसे महत्वपूर्ण नवांश कुंडली है।

एक पुरानी कहावत ज्योतिष में प्रचलित है कि लग्न कुंडली वृक्ष है और नवांश उसका फल। लग्न कुंडली बताती है कि जीवन में क्या संभावनाएं हैं। नवांश बताती है कि वे संभावनाएं वास्तव में फलित होंगी या नहीं।

नवांश कुंडली बनती कैसे है

प्रत्येक राशि तीस अंश की होती है। इस तीस अंश को नौ बराबर भागों में बांटा जाता है। हर भाग तीन अंश बीस कला का होता है। यही एक नवांश है।

बारह राशियों में नौ नवांश गिनने पर कुल एक सौ आठ नवांश बनते हैं। यह संख्या संयोग नहीं है। सत्ताईस नक्षत्रों के चार चरण भी एक सौ आठ ही होते हैं। एक नवांश और एक नक्षत्र चरण वास्तव में एक ही खंड हैं।

प्रत्येक ग्रह जिस नवांश में पड़ता है, उसी के अनुसार नवांश कुंडली में उसकी स्थिति तय होती है। यही कारण है कि नवांश लग्न हर तेरह से पंद्रह मिनट में बदल जाता है और जन्म समय की सटीकता अनिवार्य हो जाती है।

नवांश क्या दर्शाता है

पहला और सबसे प्रचलित उपयोग विवाह और जीवनसाथी का विश्लेषण है। नवांश को जीवनसाथी की कुंडली भी कहा जाता है। नवांश लग्न, नवांश का सप्तम भाव और उसमें स्थित ग्रह जीवनसाथी के स्वभाव, पृष्ठभूमि और वैवाहिक जीवन की गुणवत्ता का संकेत देते हैं।

दूसरा उपयोग ग्रहों की वास्तविक शक्ति मापना है। यह नवांश का सबसे उपेक्षित पर सबसे उपयोगी पक्ष है।

तीसरा उपयोग जीवन के उत्तरार्ध का संकेत है। ऐसा माना जाता है कि जीवन का पूर्वार्ध लग्न कुंडली से और उत्तरार्ध नवांश से अधिक प्रभावित होता है।

ग्रह बल का सत्य

मान लीजिए किसी की लग्न कुंडली में बृहस्पति उच्च राशि कर्क में स्थित है। सामान्य दृष्टि से यह अत्यंत शुभ है। पर यदि नवांश कुंडली में वही बृहस्पति नीच राशि मकर में चला जाए, तो उसे नीचांश कहते हैं और उसका शुभ फल काफी घट जाता है।

इसका उल्टा भी होता है। लग्न कुंडली में नीच राशि में बैठा ग्रह यदि नवांश में उच्च का हो जाए, तो उसे नीच भंग की स्थिति मानते हैं और वह ग्रह अपेक्षा से कहीं बेहतर फल देता है।

यही कारण है कि केवल लग्न कुंडली देखकर निष्कर्ष निकालना अधूरा विश्लेषण है।

वर्गोत्तम की विशेष स्थिति

जब कोई ग्रह लग्न कुंडली और नवांश कुंडली दोनों में एक ही राशि में स्थित होता है, तो उसे वर्गोत्तम कहते हैं। यह अत्यंत शुभ मानी जाने वाली स्थिति है।

वर्गोत्तम ग्रह में एक प्रकार की आंतरिक स्थिरता होती है। वह अपने कारकत्व को पूरी दृढ़ता से प्रकट करता है। यदि लग्नेश वर्गोत्तम हो, तो व्यक्ति में असाधारण आत्मबल और उद्देश्य की स्पष्टता देखी जाती है।

विवाह विश्लेषण में व्यावहारिक क्रम

एक अनुभवी ज्योतिषी विवाह देखते समय यह क्रम अपनाता है।

पहले लग्न कुंडली में सप्तम भाव, सप्तमेश और शुक्र की स्थिति देखी जाती है। फिर नवांश कुंडली में वही तीनों बिंदु जांचे जाते हैं। इसके बाद देखा जाता है कि सप्तमेश नवांश में बलवान है या निर्बल।

इसके साथ मंगल की स्थिति से मांगलिक दोष का आकलन, गुण मिलान से अनुकूलता और दोनों की चल रही दशा से समय का निर्धारण किया जाता है।

एक आवश्यक सावधानी

आजकल अनेक निःशुल्क ऐप नवांश कुंडली बना देते हैं। समस्या यह है कि यदि जन्म समय में पंद्रह मिनट की भी त्रुटि हो, तो नवांश पूरी तरह बदल जाएगा और उस पर आधारित हर निष्कर्ष गलत होगा।

इसलिए यदि आप विवाह जैसे निर्णय के लिए नवांश पर निर्भर हो रहे हैं, तो पहले जन्म समय की पुष्टि करवाएं। यदि समय अनिश्चित है, तो जन्म समय शोधन करवाना अधिक बुद्धिमानी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्गोत्तम ग्रह क्या होता है?+

जब कोई ग्रह लग्न कुंडली और नवांश कुंडली दोनों में एक ही राशि में स्थित हो, तो उसे वर्गोत्तम कहते हैं। ऐसा ग्रह अत्यंत बलवान माना जाता है और अपना शुभ फल पूर्णता से देता है।

नवांश कुंडली कितनी देर में बदलती है?+

नवांश लग्न लगभग हर तेरह से पंद्रह मिनट में बदल जाता है। इसीलिए D9 चार्ट के लिए जन्म समय का अत्यंत सटीक होना आवश्यक है।

क्या केवल नवांश देखकर विवाह का निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। नवांश सप्तम भाव, गुण मिलान, मंगल दोष और दोनों कुंडलियों की दशा के साथ मिलाकर देखा जाता है। अकेला कोई भी चार्ट पूर्ण निष्कर्ष नहीं देता।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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