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पूजा एवं अनुष्ठान

नवग्रह शांति पूजा - नौ ग्रहों को प्रसन्न करने का उपाय

पंडित उदय शंकर तिवारी
3 मिनट
नवग्रह शांति पूजा - नौ ग्रहों को प्रसन्न करने का उपाय

संक्षेप में

नवग्रह शांति पूजा में नौ ग्रहों का आवाहन करके उनके बीज मंत्रों से हवन किया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रहों को हटाना नहीं, बल्कि उनकी प्रतिकूल ऊर्जा को संतुलित करना है।

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है। जब ये ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में होते हैं, तो जीवन में कठिनाइयां, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक परेशानियां आ सकती हैं।

नवग्रह शांति पूजा एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है जो इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

कब करानी चाहिए यह पूजा: - जब कुंडली में कोई ग्रह दोष हो - शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो - राहु-केतु की दशा या अंतर्दशा हो - विवाह, व्यापार या नई शुरुआत से पहले - लगातार बाधाएं और असफलताएं आ रही हों

पूजा की विधि: प्रत्येक ग्रह के लिए विशिष्ट मंत्रों का जाप, हवन सामग्री, रंग और दिशा निर्धारित है। यह पूजा किसी विद्वान पंडित के मार्गदर्शन में ही करानी चाहिए। स्वयं से अधूरी पूजा करने से लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है।

नवग्रह पूजा के बाद व्यक्ति को सकारात्मक परिवर्तन, मानसिक शांति और जीवन में प्रगति का अनुभव होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह शांति कब करानी चाहिए?+

प्रतिकूल महादशा या अंतर्दशा के आरंभ पर, साढ़े साती के काल में, तथा गृह प्रवेश और विवाह जैसे बड़े संस्कारों के साथ यह पूजा कराई जाती है।

क्या सभी नौ ग्रहों की पूजा एक साथ होती है?+

हां, नवग्रह मंडल में नौ ग्रहों की एक साथ स्थापना की जाती है। जिस ग्रह की दशा प्रतिकूल हो, उसके लिए अतिरिक्त जप किया जाता है।

क्या यह पूजा दूर से कराई जा सकती है?+

हां। यजमान का नाम, गोत्र और संकल्प लेकर पूजा संपन्न कराई जा सकती है, और वीडियो के माध्यम से सहभागिता भी संभव है।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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