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पूजा एवं अनुष्ठान

रुद्राभिषेक - विधि, सामग्री और इसके वास्तविक लाभ

पंडित उदय शंकर तिवारी
5 मिनट
रुद्राभिषेक - विधि, सामग्री और इसके वास्तविक लाभ

संक्षेप में

रुद्राभिषेक भगवान शिव के रुद्र रूप का वैदिक मंत्रों के साथ किया जाने वाला अभिषेक है। इसमें शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, शर्करा और अन्य द्रव्य अर्पित करते हुए रुद्राष्टाध्यायी या नमक चमक का पाठ किया जाता है। प्रत्येक द्रव्य का अलग फल शास्त्रों में बताया गया है।

शिव उपासना के अनेक रूप हैं, पर रुद्राभिषेक को सर्वोच्च माना गया है। यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी में वर्णित रुद्र सूक्त के मंत्रों से जब शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, तो उसे रुद्राभिषेक कहते हैं।

शिव पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव अभिषेक प्रिय हैं। जहां अन्य देवता पुष्प, वस्त्र और अलंकार से प्रसन्न होते हैं, वहीं शिव केवल जल की धारा से प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शिव को आशुतोष कहा गया है, अर्थात शीघ्र प्रसन्न होने वाले।

रुद्राभिषेक का स्वरूप

रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर निरंतर धारा प्रवाहित की जाती है और साथ ही वैदिक मंत्रों का पाठ चलता रहता है।

मुख्य पाठ रुद्राष्टाध्यायी का होता है, जिसमें नमक और चमक अध्याय प्रमुख हैं। नमक अध्याय में शिव के विभिन्न रूपों को नमस्कार किया जाता है और चमक अध्याय में जीवन की आवश्यकताओं की प्रार्थना की जाती है।

द्रव्य के अनुसार फल

रुद्राभिषेक की सबसे विशिष्ट बात यह है कि अलग अलग द्रव्य से अभिषेक करने पर अलग फल बताया गया है।

जल से अभिषेक करने पर वर्षा और सामान्य शांति प्राप्त होती है। यह सबसे सरल और सर्वसुलभ रूप है।

दूध से अभिषेक करने पर आरोग्य, दीर्घायु और मानसिक शांति मिलती है। यह सबसे प्रचलित रूप है।

दही से अभिषेक करने पर संतान सुख और पशु धन की प्राप्ति मानी जाती है।

घी से अभिषेक करने पर वंश वृद्धि और आरोग्य लाभ होता है।

शहद से अभिषेक करने पर कर्ज से मुक्ति और स्वर संबंधी दोष का निवारण होता है।

शर्करा यानी चीनी के जल से अभिषेक करने पर सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

गन्ने के रस से अभिषेक करने पर धन और वैभव की प्राप्ति मानी जाती है।

भस्म से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति और पापों का नाश होता है।

पंचामृत अभिषेक

सबसे प्रचलित रूप पंचामृत अभिषेक है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शर्करा पांचों का क्रम से प्रयोग होता है। प्रत्येक द्रव्य के बाद शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।

आवश्यक सामग्री

शिवलिंग या पार्थिव शिवलिंग, गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद, शर्करा, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, भांग, सफेद पुष्प, चंदन, भस्म, धूप, दीप, नैवेद्य, कलश और आसन आवश्यक होते हैं।

बेलपत्र विशेष महत्व रखता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिव के त्रिनेत्र और त्रिगुण का प्रतीक माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय चिकना भाग शिवलिंग की ओर होना चाहिए।

कब कराया जाता है

सोमवार शिव का वार है और अभिषेक के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

प्रदोष तिथि यानी त्रयोदशी की संध्या का समय अत्यंत शुभ है। महाशिवरात्रि और संपूर्ण श्रावण मास तो शिव उपासना के लिए विशेष रूप से निर्धारित हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से शनि की साढ़े साती और ढैया के काल में, राहु और केतु की दशा में, तथा गंभीर रोग की स्थिति में रुद्राभिषेक विशेष रूप से कराया जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र के साथ किया गया रुद्राभिषेक आयु और आरोग्य के लिए सर्वाधिक प्रभावी माना जाता है।

कुछ आवश्यक नियम

अभिषेक की धारा कभी टूटनी नहीं चाहिए, इसलिए धारा पात्र का प्रयोग किया जाता है।

शिवलिंग पर केतकी का पुष्प और तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। हल्दी भी शिवलिंग पर वर्जित है।

अभिषेक का जल जिस दिशा से निकलता है, उस निर्माल्य को लांघना नहीं चाहिए।

शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। प्रयोग में आने वाले सभी द्रव्य शुद्ध और ताजे होने चाहिए।

एक व्यावहारिक बात

रुद्राभिषेक का वास्तविक प्रभाव मंत्रों के शुद्ध उच्चारण और संकल्प की स्पष्टता पर निर्भर करता है। रुद्राष्टाध्यायी का स्वर सहित पाठ कठिन है और इसमें त्रुटि से फल में अंतर आता है।

इसीलिए महत्वपूर्ण अवसरों पर योग्य और अभ्यस्त पंडित से ही अनुष्ठान कराना उचित रहता है। सामग्री की भव्यता से अधिक महत्व विधि की शुद्धता और भाव की सच्चाई का है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुद्राभिषेक कब कराना चाहिए?+

सोमवार, प्रदोष तिथि, महाशिवरात्रि और श्रावण मास विशेष रूप से शुभ हैं। इसके अतिरिक्त जन्म नक्षत्र के दिन, रोग निवारण हेतु और शनि तथा राहु की दशा में भी रुद्राभिषेक कराया जाता है।

क्या घर पर रुद्राभिषेक किया जा सकता है?+

हां, घर पर पार्थिव शिवलिंग या धातु के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक किया जा सकता है। पूर्ण वैदिक विधि के लिए योग्य पंडित का होना उचित है, क्योंकि रुद्राष्टाध्यायी का शुद्ध उच्चारण आवश्यक है।

क्या रुद्राभिषेक दूरस्थ रूप से कराया जा सकता है?+

हां। यजमान के नाम, गोत्र और संकल्प के साथ मंदिर या निर्धारित स्थान पर रुद्राभिषेक कराया जा सकता है। विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए यह प्रचलित व्यवस्था है और वीडियो के माध्यम से सहभागिता भी संभव है।

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