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करियर एवं शिक्षा

दशम भाव और करियर - कुंडली से आजीविका का चुनाव कैसे करें

पंडित उदय शंकर तिवारी
6 मिनट
दशम भाव और करियर - कुंडली से आजीविका का चुनाव कैसे करें

संक्षेप में

दशम भाव कर्म, आजीविका, सामाजिक प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। करियर तय करने के लिए दशम भाव की राशि, उसमें स्थित ग्रह, दशमेश की स्थिति और दशमेश जिस नक्षत्र में हो उसका स्वामी, इन चारों को मिलाकर देखा जाता है।

करियर संबंधी प्रश्न आज ज्योतिषी के पास सबसे अधिक आने वाले प्रश्नों में से हैं। विशेषकर युवा यह जानना चाहते हैं कि उन्हें किस दिशा में जाना चाहिए और किस क्षेत्र में उनकी सफलता की संभावना अधिक है।

वैदिक ज्योतिष इसका उत्तर एक भाव से नहीं, कई संकेतों को मिलाकर देता है।

दशम भाव का महत्व

दशम भाव कुंडली का सर्वोच्च बिंदु है। यह आकाश का वह भाग है जो जन्म के समय ठीक आपके सिर के ऊपर था। इसे कर्म भाव कहा जाता है।

यह भाव आपकी आजीविका, कार्यक्षेत्र, सामाजिक प्रतिष्ठा, अधिकार और समाज में आपकी पहचान दर्शाता है। यह भी दर्शाता है कि लोग आपको किस रूप में जानेंगे।

करियर पढ़ने का क्रम

पहला चरण है दशम भाव की राशि देखना। चर राशि यानी मेष, कर्क, तुला, मकर में परिवर्तनशील और गतिशील कार्य अनुकूल रहते हैं। स्थिर राशि यानी वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ में एक ही क्षेत्र में लंबा टिकना अनुकूल है। द्विस्वभाव राशि यानी मिथुन, कन्या, धनु, मीन में एक साथ कई भूमिकाएं निभाने की क्षमता रहती है।

दूसरा चरण है दशम भाव में स्थित ग्रह देखना। जो ग्रह वहां बैठा है, उसका स्वभाव कार्यक्षेत्र पर सीधा प्रभाव डालता है।

तीसरा चरण है दशमेश की स्थिति देखना। दशमेश किस भाव में है, यह बताता है कि आजीविका का स्रोत कहां से आएगा। यदि दशमेश नवम भाव में हो, तो भाग्य और विदेश से जुड़ा कार्य संभव है। यदि पंचम भाव में हो, तो शिक्षा, रचनात्मकता या परामर्श से आय की संभावना बनती है।

चौथा और सूक्ष्म चरण है दशमेश जिस नक्षत्र में स्थित है, उस नक्षत्र के स्वामी को देखना। अनुभवी ज्योतिषी इसी से सबसे सटीक संकेत निकालते हैं।

ग्रहों के अनुसार कार्यक्षेत्र

सूर्य प्रशासन, सरकारी सेवा, राजनीति, चिकित्सा और नेतृत्व के पदों से जुड़ा है।

चंद्रमा जनसंपर्क, आतिथ्य, तरल पदार्थ, नर्सिंग, मनोविज्ञान और जनसामान्य से जुड़े कार्यों का प्रतिनिधित्व करता है।

मंगल अभियांत्रिकी, सेना, पुलिस, शल्य चिकित्सा, भूमि, निर्माण और खेल से जुड़ा है।

बुध संवाद, लेखन, लेखा, गणित, व्यापार, सॉफ्टवेयर और मध्यस्थता का कारक है।

बृहस्पति शिक्षा, विधि, परामर्श, धर्म, वित्त और सलाहकार भूमिकाओं का कारक है।

शुक्र कला, संगीत, सौंदर्य, फैशन, मनोरंजन, विलासिता वस्तुओं और डिजाइन से जुड़ा है।

शनि श्रम, खनन, लोहा, निर्माण, अनुसंधान, कानून प्रवर्तन और दीर्घकालिक परिश्रम वाले कार्यों का कारक है।

राहु तकनीक, विदेश, अनुसंधान, विमानन, आयात निर्यात और अपरंपरागत क्षेत्रों से जुड़ा है।

केतु अध्यात्म, अनुसंधान, चिकित्सा, ज्योतिष और सूक्ष्म विषयों का कारक है।

नौकरी या व्यवसाय

यह प्रश्न प्रायः पूछा जाता है। इसका उत्तर षष्ठ और सप्तम भाव की तुलना से मिलता है।

षष्ठ भाव सेवा का है। यदि षष्ठेश बलवान हो और दशम भाव से संबंध बनाए, तो नौकरी अनुकूल रहती है।

सप्तम भाव साझेदारी और व्यापार का है। यदि सप्तमेश बलवान हो, लग्नेश स्वतंत्र प्रवृत्ति का हो और दशम भाव पर बृहस्पति या शुक्र का प्रभाव हो, तो व्यवसाय अधिक उपयुक्त रहता है।

समय का प्रश्न

करियर में बड़े परिवर्तन प्रायः दशमेश या दशम भाव से जुड़े ग्रह की दशा आरंभ होने पर आते हैं।

शनि का गोचर दशम भाव से गुजरते समय कार्यक्षेत्र में गंभीर पुनर्गठन लाता है। बृहस्पति का दशम या एकादश भाव में गोचर प्रायः उन्नति और विस्तार का काल होता है।

एक व्यावहारिक बात

ज्योतिष आपके लिए करियर नहीं चुनता। वह आपकी प्राकृतिक प्रवृत्ति और अनुकूल दिशा का संकेत देता है।

यदि आपकी कुंडली शिक्षा और परामर्श की ओर संकेत कर रही है, पर आप अभियांत्रिकी में हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप असफल होंगे। इसका अर्थ केवल यह है कि पहली दिशा में समान परिश्रम से अधिक संतोष और गति मिल सकती थी।

निर्णय हमेशा ज्योतिषीय संकेत, आपकी योग्यता और आपकी रुचि तीनों को मिलाकर लेना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या केवल दशम भाव से करियर तय होता है?+

नहीं। दशम भाव के साथ द्वितीय भाव यानी आय, षष्ठ भाव यानी सेवा और नौकरी, तथा एकादश भाव यानी लाभ को भी देखा जाता है। लग्नेश की स्थिति व्यक्ति की मूल प्रवृत्ति बताती है।

नौकरी और व्यवसाय में से क्या चुनें?+

यदि षष्ठ भाव और उसका स्वामी बलवान हो तो नौकरी अनुकूल रहती है। यदि सप्तम और दशम भाव बलवान हों और लग्नेश स्वतंत्र प्रवृत्ति का हो, तो व्यवसाय अधिक उपयुक्त रहता है।

करियर में बदलाव का समय कैसे जाना जाए?+

दशमेश या दशम भाव से संबंधित ग्रह की महादशा तथा अंतर्दशा के आरंभ पर कार्यक्षेत्र में बड़े परिवर्तन आते हैं। शनि और बृहस्पति का गोचर भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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