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करियर एवं शिक्षा

विदेश यात्रा और विदेश में बसने के योग - कुंडली क्या कहती है

पंडित उदय शंकर तिवारी
5 मिनट
विदेश यात्रा और विदेश में बसने के योग - कुंडली क्या कहती है

संक्षेप में

कुंडली में विदेश गमन का मुख्य संकेत द्वादश भाव से मिलता है, जो दूरस्थ स्थान और विदेशी भूमि का प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ नवम भाव यानी लंबी यात्रा, चतुर्थ भाव यानी मातृभूमि से दूरी, और राहु की स्थिति निर्णायक होती है।

भारत से बाहर बसे परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके साथ यह प्रश्न भी बढ़ा है कि क्या कुंडली में विदेश जाने का योग है। यह प्रश्न विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और विवाह योग्य युवाओं तीनों से आता है।

वैदिक ज्योतिष में विदेश गमन का विश्लेषण कई भावों के संयोजन से किया जाता है।

द्वादश भाव की केंद्रीय भूमिका

द्वादश भाव को व्यय भाव कहा जाता है, पर इसका एक बड़ा आयाम दूरस्थ स्थान भी है। यह भाव मातृभूमि से दूर के स्थानों, एकांत, आश्रम और विदेशी भूमि का प्रतिनिधित्व करता है।

यदि द्वादशेश बलवान हो और लग्नेश, दशमेश या चतुर्थेश से संबंध बनाए, तो विदेश गमन की प्रबल संभावना बनती है।

नवम भाव और लंबी यात्रा

नवम भाव लंबी यात्राओं, उच्च शिक्षा और धर्म का है। विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वालों की कुंडली में प्रायः नवम भाव सक्रिय मिलता है।

जब नवमेश और द्वादशेश आपस में संबंध बनाते हैं, तो शिक्षा या धार्मिक कार्य से जुड़ा विदेश प्रवास संभव होता है।

चतुर्थ भाव और जड़ों से दूरी

चतुर्थ भाव मातृभूमि, घर और जड़ों का है। विदेश में स्थायी निवास के लिए चतुर्थ भाव का पीड़ित या कमजोर होना एक सामान्य संकेत है।

यदि चतुर्थेश द्वादश भाव में चला जाए या राहु चतुर्थ भाव को प्रभावित करे, तो व्यक्ति जन्मस्थान से दूर बसता है।

राहु का विशेष महत्व

विदेश योग में राहु सबसे प्रबल कारक है। राहु अपरिचित, विदेशी, अपरंपरागत और सीमा से परे की वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करता है।

राहु का लग्न, चतुर्थ, नवम, दशम या द्वादश भाव में होना विदेश से जुड़ाव का प्रबल संकेत माना जाता है। राहु की महादशा में अनेक लोगों का विदेश गमन होता देखा गया है।

अन्य ग्रहों की भूमिका

शनि दूरी, अलगाव और स्थायित्व देता है। शनि का द्वादश भाव से संबंध लंबे प्रवास का संकेत देता है।

चंद्रमा और शुक्र जल तत्व से जुड़े हैं, इसलिए समुद्र पार यात्रा में इनका योगदान माना जाता है।

बृहस्पति का द्वादश या नवम भाव से संबंध शिक्षा या परामर्श कार्य से विदेश गमन दर्शाता है।

यात्रा और स्थायी निवास में अंतर

यह भेद महत्वपूर्ण है और प्रायः अनदेखा कर दिया जाता है।

केवल यात्रा के लिए नवम और तृतीय भाव का सक्रिय होना पर्याप्त है। स्थायी निवास के लिए चतुर्थ भाव का कमजोर होना और द्वादश भाव का बलवान होना दोनों आवश्यक हैं।

यदि चतुर्थ भाव अत्यंत बलवान है, तो व्यक्ति विदेश जाकर भी अंततः लौट आता है।

समय का निर्धारण

विदेश गमन प्रायः द्वादशेश, नवमेश या राहु की महादशा तथा अंतर्दशा में होता है। गोचर में शनि या बृहस्पति का इन भावों से गुजरना अवसर को सक्रिय करता है।

यदि कोई विदेश जाने का प्रयास कर रहा है पर सफलता नहीं मिल रही, तो प्रायः कारण यह होता है कि अनुकूल दशा अभी आरंभ नहीं हुई है।

विदेश में रहने वालों के लिए एक आवश्यक बात

जो परिवार भारत से बाहर हैं, उनके लिए एक तकनीकी बिंदु महत्वपूर्ण है। कुंडली सदैव जन्म स्थान के अक्षांश, देशांतर और उस समय के समय क्षेत्र के अनुसार बनती है।

यदि किसी बच्चे का जन्म विदेश में हुआ है, तो उसकी कुंडली भारतीय समय के आधार पर नहीं बनाई जा सकती। यह एक सामान्य त्रुटि है जो निःशुल्क ऐप में अक्सर हो जाती है, क्योंकि वे प्रायः भारतीय मानक समय को स्थिर मान लेते हैं।

इसी प्रकार मुहूर्त निकालते समय भी आपके वर्तमान निवास का सूर्योदय और स्थानीय समय आधार बनता है, भारत का नहीं। इस समायोजन के बिना निकाला गया मुहूर्त सही नहीं होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन सा ग्रह विदेश गमन कराता है?+

राहु विदेश का सबसे प्रबल कारक है क्योंकि वह अपरिचित और विदेशी तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। शनि दूरी और स्थायी प्रवास देता है, जबकि चंद्रमा और शुक्र जल पार यात्रा से जुड़े हैं।

विदेश जाने का सही समय कैसे जानें?+

द्वादशेश, नवमेश या राहु की महादशा तथा अंतर्दशा में विदेश गमन की संभावना सर्वाधिक रहती है। इस काल में गोचर का समर्थन मिलने पर योग फलित होता है।

क्या विदेश में रहकर भी पूजा और कुंडली परामर्श संभव है?+

हां। वीडियो परामर्श से कुंडली विश्लेषण पूर्णतः संभव है और अनेक पूजा तथा अनुष्ठान संकल्प सहित दूरस्थ रूप से संपन्न कराए जाते हैं। समय क्षेत्र के अनुसार मुहूर्त की गणना अलग से की जाती है।

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कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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