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मुहूर्त

विवाह मुहूर्त का चयन - शुभ समय कैसे निकालें

पंडित उदय शंकर तिवारी
4 मिनट
विवाह मुहूर्त का चयन - शुभ समय कैसे निकालें

संक्षेप में

विवाह मुहूर्त निकालते समय शुभ मास, तिथि, नक्षत्र, वार और लग्न पांचों देखे जाते हैं, साथ ही वर तथा वधू दोनों की कुंडली में गुरु और शुक्र की स्थिति। चातुर्मास और मलमास में विवाह नहीं किया जाता।

हिंदू परंपरा में विवाह एक पवित्र संस्कार है और इसका शुभ मुहूर्त में संपन्न होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही मुहूर्त दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और सौहार्द लाता है।

मुहूर्त चयन में देखे जाने वाले कारक:

  • तिथि - द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी शुभ मानी जाती हैं
  • नक्षत्र - रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती विवाह के लिए शुभ हैं
  • वार - सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ माने जाते हैं
  • लग्न - विवाह लग्न में शुभ ग्रहों की स्थिति आवश्यक है

अशुभ काल जिनमें विवाह वर्जित है: - मलमास (अधिक मास) - पितृ पक्ष - चतुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी) - ग्रहण काल

वर-वधू दोनों की कुंडली के अनुसार ऐसा समय चुना जाता है जब शुभ ग्रह बलवान हों और अशुभ ग्रहों का प्रभाव न्यूनतम हो। यह कार्य किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से ही कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किन महीनों में विवाह नहीं होता?+

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चातुर्मास में तथा मलमास यानी अधिक मास में विवाह वर्जित माना जाता है।

विवाह के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?+

रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती प्रमुख रूप से शुभ माने जाते हैं।

क्या विदेश में विवाह का मुहूर्त अलग होगा?+

हां। तिथि और नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करते हैं, इसलिए मुहूर्त उस स्थान के अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र के अनुसार निकाला जाना चाहिए।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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