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मुहूर्त

नया वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

पंडित उदय शंकर तिवारी
4 मिनट
नया वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

संक्षेप में

वाहन खरीदने के लिए बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और सोमवार शुभ माने जाते हैं। नक्षत्रों में अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, धनिष्ठा और रेवती अनुकूल हैं। रिक्ता तिथियां, अमावस्या और मंगलवार तथा शनिवार सामान्यतः टाले जाते हैं।

वाहन खरीदना आज अधिकांश परिवारों के लिए एक बड़ा निर्णय होता है। इसमें पर्याप्त धन लगता है और उसका उपयोग वर्षों तक होता है। इसीलिए परंपरा में इसके लिए शुभ मुहूर्त देखने की प्रथा है।

इसके पीछे भाव यह है कि जिस समय कोई वस्तु जीवन में प्रवेश करती है, उस समय की ऊर्जा उसके साथ जुड़ जाती है।

शुभ वार

सोमवार चंद्रमा का दिन है और यात्रा तथा सुख के लिए अनुकूल माना जाता है।

बुधवार बुध का दिन है और यह गति, संचार और व्यापार से जुड़ा है, इसलिए वाहन के लिए उत्तम है।

गुरुवार बृहस्पति का दिन है और सभी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल है।

शुक्रवार शुक्र का दिन है। शुक्र वाहन और भौतिक सुख का कारक है, इसलिए यह वाहन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

रविवार को कुछ आचार्य स्वीकार करते हैं, पर इस पर मतभेद है।

मंगलवार और शनिवार सामान्यतः टाले जाते हैं। मंगल दुर्घटना और आक्रामकता से जुड़ा है तथा शनि विलंब और अवरोध से।

शुभ नक्षत्र

अश्विनी नक्षत्र गति का प्रतीक है और वाहन के लिए अत्यंत अनुकूल है।

रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, धनिष्ठा और रेवती भी उत्तम माने जाते हैं।

पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है और इसमें की गई खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।

भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र में नया वाहन लेने से बचा जाता है।

शुभ तिथि

द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी शुभ मानी जाती हैं।

चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी रिक्ता तिथियां हैं और इनमें नया कार्य टाला जाता है।

अमावस्या को नया वाहन लेना उचित नहीं माना जाता।

राहुकाल का ध्यान

प्रत्येक दिन एक निश्चित अवधि राहुकाल की होती है, जिसमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता।

यह अवधि प्रत्येक वार के लिए अलग होती है और स्थान के अनुसार भी बदलती है, क्योंकि यह सूर्योदय से गणना की जाती है।

वाहन की डिलीवरी लेते समय राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल तीनों से बचना चाहिए।

कुंडली का पक्ष

व्यक्तिगत स्तर पर देखा जाए तो कुंडली में चतुर्थ भाव वाहन सुख का भाव है और शुक्र वाहन का कारक ग्रह है।

यदि चतुर्थ भाव या शुक्र पर गोचर में शुभ प्रभाव हो, तो वह काल वाहन खरीदने के लिए विशेष अनुकूल होता है।

साथ ही यह भी देखा जाता है कि व्यक्ति की चल रही दशा बड़े निवेश के लिए अनुकूल है या नहीं।

वाहन पूजा की सामग्री

नारियल, नींबू, रोली, मौली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, पुष्प, धूप, दीप, कपूर, गंगाजल, मिठाई और गुड़ आवश्यक होते हैं।

पूजा की विधि

सर्वप्रथम वाहन को धोकर स्वच्छ करें।

गंगाजल छिड़ककर वाहन का शुद्धीकरण करें।

वाहन के आगे के भाग पर सिंदूर या कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं।

चारों पहियों पर हल्दी और कुमकुम का तिलक करें और मौली बांधें।

गणेश जी का स्मरण करके पूजा आरंभ करें, क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं और यात्रा की मंगल कामना के लिए उनका आवाहन किया जाता है।

धूप दीप दिखाकर आरती करें।

नारियल फोड़ें और नींबू को वाहन के पहिये के नीचे रखकर आगे बढ़ाएं। यह परंपरा नकारात्मक ऊर्जा के निवारण का प्रतीक मानी जाती है।

मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें।

अंत में परिवार सहित वाहन में बैठकर पहली यात्रा किसी मंदिर तक करें, यह शुभ माना जाता है।

एक व्यावहारिक समाधान

आज की परिस्थिति में शोरूम की डिलीवरी तिथि हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होती।

ऐसी स्थिति में एक स्वीकार्य समाधान यह है कि वाहन को घर या किसी उपयुक्त स्थान पर ले आएं और उसका विधिवत प्रयोग शुभ मुहूर्त में आरंभ करें।

शास्त्रीय दृष्टि से प्रथम प्रयोग का मुहूर्त अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि डिलीवरी का दिन अनुकूल न हो, तो पूजा और प्रथम यात्रा का मुहूर्त अलग से निकाला जा सकता है।

अंतिम बात

मुहूर्त एक सहायक तत्व है, सुरक्षा का विकल्प नहीं। सर्वोत्तम मुहूर्त में लिया गया वाहन भी सावधानी से चलाने की आवश्यकता समाप्त नहीं करता।

परंपरा का पालन श्रद्धा से करें और सड़क पर सतर्कता का पालन विवेक से।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शनिवार को गाड़ी खरीदना अशुभ है?+

परंपरा में शनिवार और मंगलवार को नया वाहन लेना टाला जाता है। शनि विलंब और मंगल दुर्घटना से जोड़े जाते हैं। यदि अन्य दिन संभव न हो तो शुभ नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त देखकर लिया जा सकता है।

वाहन पूजा में क्या क्या चाहिए?+

नारियल, नींबू, रोली, मौली, अक्षत, हल्दी, पुष्प, धूप, दीप, मिठाई, गंगाजल और स्वस्तिक बनाने के लिए सिंदूर आवश्यक होते हैं। कुछ परंपराओं में चारों पहियों पर हल्दी और कुमकुम लगाया जाता है।

क्या डिलीवरी का दिन और पूजा का दिन अलग हो सकते हैं?+

हां। यदि शोरूम की डिलीवरी अशुभ दिन पड़ रही हो, तो वाहन घर लाकर शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा करके पहली बार प्रयोग आरंभ किया जा सकता है। प्रथम प्रयोग का मुहूर्त अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

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