ब्लॉग पर वापस जाएं
संस्कार

मुंडन संस्कार - सही आयु, मुहूर्त और विधि

पंडित उदय शंकर तिवारी
4 मिनट
मुंडन संस्कार - सही आयु, मुहूर्त और विधि

संक्षेप में

मुंडन या चूड़ाकर्म संस्कार में बालक के जन्म के बाद पहली बार सिर के बाल उतारे जाते हैं। यह सोलह संस्कारों में आठवां है और सामान्यतः पहले, तीसरे या पांचवें वर्ष में विषम आयु में कराया जाता है। इसके लिए शुभ नक्षत्र और मुहूर्त का विशेष महत्व है।

हिंदू परंपरा में सोलह संस्कारों की व्यवस्था है, जो गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण पड़ाव को पवित्र करते हैं। मुंडन या चूड़ाकर्म इनमें आठवां संस्कार है।

संस्कार का उद्देश्य

इस संस्कार में बालक के जन्म के समय के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। इसके पीछे कई भाव हैं।

शास्त्रीय दृष्टि से माना जाता है कि जन्म के समय के बाल पूर्व जन्म के संस्कारों से जुड़े होते हैं और उन्हें उतारने से बालक नए जीवन में शुद्ध होकर प्रवेश करता है।

व्यावहारिक दृष्टि से यह भी माना जाता है कि इससे बालों की वृद्धि बेहतर होती है और सिर की शुद्धि होती है।

एक तीसरा भाव यह भी है कि इस संस्कार से बालक की आयु और बुद्धि में वृद्धि होती है। इसीलिए इसे आयुष्य वर्धक संस्कार भी कहा गया है।

सही आयु

परंपरागत रूप से मुंडन विषम वर्ष में कराया जाता है, अर्थात पहले, तीसरे या पांचवें वर्ष में।

कुछ क्षेत्रों और कुलों में यह जन्म के प्रथम वर्ष के भीतर ही करा दिया जाता है। कुछ में तीसरे वर्ष की परंपरा है।

सबसे उचित यह है कि अपने कुल की परंपरा का पालन किया जाए। जहां परंपरा स्पष्ट न हो, वहां तीसरा वर्ष सामान्यतः उपयुक्त माना जाता है।

शुभ समय का निर्धारण

मुहूर्त निकालते समय कई बातें देखी जाती हैं।

शुभ मास में माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ को अनुकूल माना जाता है। सामान्यतः पौष और अधिक मास में यह संस्कार नहीं किया जाता।

शुभ नक्षत्र में अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती प्रमुख हैं।

शुभ तिथि में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी उपयुक्त हैं। रिक्ता तिथियां और अमावस्या वर्जित हैं।

वार में सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ हैं। मंगलवार, शनिवार और रविवार सामान्यतः टाले जाते हैं।

इसके अतिरिक्त बालक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और तारा बल देखना आवश्यक है।

विधि का क्रम

सर्वप्रथम गणेश पूजन और कलश स्थापना की जाती है।

इसके बाद नवग्रह पूजन और कुल देवता का आवाहन होता है।

फिर संकल्प लिया जाता है जिसमें बालक का नाम, गोत्र और संस्कार का उद्देश्य कहा जाता है।

मुंडन के समय बालक को मामा या पिता की गोद में बैठाया जाता है। परंपरा में मामा की गोद का विशेष महत्व है।

नाई द्वारा बाल उतारने से पूर्व पंडित मंत्रोच्चार करते हुए प्रतीकात्मक रूप से पहली लट काटते हैं।

बाल उतारने के बाद बालक को स्नान कराया जाता है और सिर पर हल्दी, चंदन या दही का लेप किया जाता है।

अंत में हवन, आरती और ब्राह्मण भोजन तथा दान किया जाता है।

उतारे गए बालों का विसर्जन

उतारे गए बालों को अपमानपूर्वक नहीं फेंका जाता। परंपरा में इन्हें किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है या कुल देवता के स्थान पर अर्पित किया जाता है।

कई परिवार गंगा में विसर्जन की परंपरा निभाते हैं। जहां यह संभव न हो, वहां किसी स्वच्छ जलाशय या वृक्ष के मूल में विसर्जन किया जा सकता है।

कुछ आवश्यक सावधानियां

बालक स्वस्थ होना चाहिए। बीमारी की अवस्था में संस्कार टाल देना चाहिए।

माता के गर्भवती होने पर परंपरा में इसे टालने की सलाह दी जाती है।

परिवार में सूतक या पातक की स्थिति में संस्कार नहीं किया जाता।

बालक को डर न लगे इसका ध्यान रखें। कई बार बालक भयभीत हो जाता है, इसलिए वातावरण सहज और प्रसन्न रखना चाहिए।

विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए

यदि परिवार भारत से बाहर है, तो मुहूर्त की गणना उनके स्थानीय समय और सूर्योदय के आधार पर की जानी चाहिए, भारतीय समय के आधार पर नहीं।

यह एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु है जिसे प्रायः अनदेखा कर दिया जाता है। तिथि और नक्षत्र के आरंभ तथा समाप्ति के समय स्थान के अनुसार बदल जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंडन किस उम्र में कराना चाहिए?+

परंपरा के अनुसार पहले, तीसरे या पांचवें वर्ष में, अर्थात विषम वर्ष में कराया जाता है। कुछ परिवारों में कुल परंपरा के अनुसार समय भिन्न हो सकता है, जिसका पालन करना चाहिए।

मुंडन के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?+

अश्विनी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती नक्षत्र शुभ माने जाते हैं। मंगलवार, शनिवार और रविवार सामान्यतः वर्जित हैं।

क्या माता के गर्भवती होने पर मुंडन कराया जा सकता है?+

परंपरा में माता के गर्भवती होने की अवस्था में बालक का मुंडन टालने की सलाह दी जाती है। ऐसी स्थिति में कुल के आचार्य से परामर्श लेकर निर्णय करना उचित रहता है।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

परामर्श बुक करें

संबंधित लेख

Chat with us!