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विदेश से ऑनलाइन पूजा और कुंडली परामर्श - क्या यह शास्त्र सम्मत है

पंडित उदय शंकर तिवारी
5 मिनट
विदेश से ऑनलाइन पूजा और कुंडली परामर्श - क्या यह शास्त्र सम्मत है

संक्षेप में

दूरस्थ रूप से कराई गई पूजा शास्त्र सम्मत है, क्योंकि अनुष्ठान का आधार संकल्प है, भौतिक उपस्थिति नहीं। यजमान का नाम, गोत्र और स्थान लेकर संकल्प करने पर पूजा का फल यजमान को प्राप्त होता है। कुंडली परामर्श वीडियो के माध्यम से पूर्णतः संभव है, बशर्ते जन्म विवरण सही हो।

भारत से बाहर बसे परिवारों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसके साथ एक प्रश्न बार बार आता है कि क्या दूर रहकर कराई गई पूजा का वही फल मिलता है, और क्या वीडियो पर लिया गया कुंडली परामर्श विश्वसनीय होता है।

इसका उत्तर शास्त्र और व्यवहार दोनों दृष्टि से स्पष्ट है।

संकल्प ही अनुष्ठान का मूल है

वैदिक कर्मकांड में किसी भी पूजा का आरंभ संकल्प से होता है। संकल्प में यजमान अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और पूजा का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कहता है।

शास्त्रीय दृष्टि से यही संकल्प वह सूत्र है जो यजमान को अनुष्ठान से जोड़ता है। भौतिक उपस्थिति सहायक है, पर अनिवार्य नहीं।

यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। सदियों से काशी, गया और प्रयाग में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण दूर से कराते आए हैं। यजमान स्वयं उपस्थित नहीं होता, केवल नाम और गोत्र भेजता है।

इसी परंपरा का आधुनिक रूप आज की दूरस्थ पूजा है।

कौन से अनुष्ठान दूर से संभव हैं

सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक, नवग्रह शांति, महामृत्युंजय जप, ग्रह शांति अनुष्ठान, पितृ तर्पण और विभिन्न मंत्र अनुष्ठान दूरस्थ रूप से कराए जा सकते हैं।

इनमें यजमान वीडियो के माध्यम से सम्मिलित हो सकता है और संकल्प के समय स्वयं उपस्थित रहकर अपना नाम और गोत्र कह सकता है।

कुछ संस्कार ऐसे हैं जिनमें यजमान की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है, जैसे विवाह, मुंडन, उपनयन और गृह प्रवेश। इनमें व्यक्ति स्वयं क्रिया का भाग होता है।

ऐसी स्थिति में दो विकल्प रहते हैं। या तो स्थानीय स्तर पर योग्य पंडित की व्यवस्था की जाए, या वीडियो के माध्यम से मार्गदर्शन लेकर परिवार का वरिष्ठ सदस्य विधि संपन्न कराए। दूसरा विकल्प उन स्थानों पर उपयोगी है जहां पंडित उपलब्ध नहीं होते।

समय क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्रश्न

यह वह बिंदु है जहां सबसे अधिक त्रुटियां होती हैं और जिसे प्रायः अनदेखा कर दिया जाता है।

हिंदू तिथि सूर्योदय से आरंभ होती है और तिथि का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है। इसका अर्थ यह है कि भारत में जो तिथि चल रही है, वही तिथि अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में उसी समय नहीं होती।

एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा और सभी व्रत की तिथियां स्थानीय गणना से तय होनी चाहिए। भारत का पंचांग वहां सीधे लागू नहीं होता।

इसी प्रकार करवा चौथ का चंद्रोदय, छठ का अर्घ्य समय, नवरात्रि की घटस्थापना और एकादशी का पारण, सभी स्थानीय समय के अनुसार निकाले जाते हैं।

एक सामान्य भ्रम यह होता है कि लोग भारत में रह रहे परिवार के साथ एक ही दिन व्रत करना चाहते हैं। भावनात्मक रूप से यह समझ में आता है, पर शास्त्रीय दृष्टि से व्रत उस स्थान की तिथि के अनुसार होना चाहिए जहां व्रती स्वयं उपस्थित है।

विदेश में जन्मे बच्चों की कुंडली

यह एक और महत्वपूर्ण तकनीकी विषय है।

कुंडली सदैव जन्म स्थान के अक्षांश, देशांतर और उस समय वहां प्रचलित समय क्षेत्र के आधार पर बनती है।

यदि किसी बच्चे का जन्म लंदन, न्यूयॉर्क या सिडनी में हुआ है, तो उसकी कुंडली उसी स्थान के निर्देशांक से बनेगी। भारतीय मानक समय के आधार पर बनाई गई कुंडली में लग्न पूरी तरह गलत निकलेगा।

एक और सूक्ष्म बिंदु डेलाइट सेविंग टाइम का है। अनेक देशों में वर्ष के कुछ महीनों में घड़ी एक घंटा आगे कर दी जाती है। यदि जन्म उस अवधि में हुआ है, तो गणना में यह एक घंटा समायोजित करना अनिवार्य है।

अनेक निःशुल्क ऐप यह समायोजन नहीं करते, जिससे लग्न और नवांश दोनों गलत हो जाते हैं। यह त्रुटि पूरे विश्लेषण को निरर्थक बना देती है।

परामर्श की व्यावहारिक व्यवस्था

वीडियो परामर्श के लिए तीन जानकारियां सटीक होनी चाहिए, जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान।

जन्म समय जन्म प्रमाणपत्र या अस्पताल के रिकॉर्ड से लेना सर्वोत्तम है। स्मृति के आधार पर बताया गया समय प्रायः अनुमानित होता है।

यदि जन्म समय अनिश्चित हो, तो जन्म समय शोधन कराया जा सकता है, जिसमें जीवन की घटित घटनाओं के आधार पर सही समय का निर्धारण किया जाता है।

समय क्षेत्र के अंतर के कारण परामर्श का समय दोनों पक्षों की सुविधा से तय किया जाता है।

एक अंतिम विचार

दूरी श्रद्धा में बाधा नहीं बनती। शास्त्रों में बार बार कहा गया है कि भाव प्रधान है और विधि उसका माध्यम है।

जो परिवार हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी अपनी परंपरा को जीवित रखना चाहते हैं, उनका यह प्रयास स्वयं में एक साधना है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि विधि और गणना सही हो, ताकि श्रद्धा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बिना उपस्थित हुए पूजा का फल मिलता है?+

हां। शास्त्रों में संकल्प को अनुष्ठान का मूल माना गया है। यजमान का नाम, गोत्र, स्थान और उद्देश्य लेकर किया गया संकल्प पूजा का फल यजमान तक पहुंचाता है। यह परंपरा तीर्थ स्थानों पर सदियों से चली आ रही है।

विदेश में जन्मे बच्चे की कुंडली कैसे बनती है?+

कुंडली सदैव जन्म स्थान के अक्षांश, देशांतर और उस समय के स्थानीय समय क्षेत्र के अनुसार बनती है। भारतीय समय के आधार पर बनाई गई कुंडली गलत होगी। डेलाइट सेविंग टाइम का समायोजन भी आवश्यक है।

क्या व्रत और त्योहार की तिथि विदेश में अलग होती है?+

हां, प्रायः अलग होती है। तिथि का आरंभ और समाप्ति स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करती है। इसलिए भारत की तिथि विदेश में एक दिन आगे या पीछे हो सकती है। स्थानीय गणना ही मान्य होती है।

इस कुंडली का अर्थ जानना चाहते हैं?

कुंडली बनाना पहला चरण है। पंडित उदय जी से विस्तृत विश्लेषण कराएं और जानें कि ये ग्रह स्थितियां आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।

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